जनता की पीड़ा को दूर करना जिला प्रशासन का मुख्य मकसद है : एडीएम
जमुई। संवाददाता। अपर समाहर्ता सुभाष चंद्र मंडल ने समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में जनता दरबार का आयोजन कर पीड़ित लोगों की गंभीरता से व्यथा सुनी। उन्होंने मौके पर कई मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन भी किया साथ ही कुछ प्रकरणों को इससे जुड़े विभाग को अग्रसारित कर विधि सम्मत कार्रवाई किए जाने का निर्देश दिया। जिले के दूर-दराज से आए लोग जनता दरबार में अपनी बात रखकर संतुष्ट दिखे।
एडीएम ने जनता दरबार में भूमि विवाद, अतिक्रमण, दाखिल खारिज, रैयति भूमि का निबंधन, अनुग्रह अनुदान, खतियान, दखल-कब्ज़ा, जमीन की नापी, प्रधानमंत्री आवास योजना, विकलांग पेंशन, चयन प्रक्रिया, जमाबंदी, सेवान्त लाभ, सामाजिक सुरक्षा से लाभ, अनुज्ञप्ति रद्द, अनुकम्पा नियुक्ति, राशि-गबन, रास्ता अवरुद्ध, मार-पीट, बासगीत पर्चा, पक्की नली गली, आंगनबाड़ी, गैर मजरूआ विवाद, बिजली समेत अन्य मामले उपस्थापित किए गए। उन्होंने तमाम प्रकरणों को गंभीरता से लिया और इस पर यथोचित कार्रवाई किए जाने की बात कही।
एडीएम ने इस अवसर पर कहा कि जनता की पीड़ा को दूर करना जिला प्रशासन का मुख्य मकसद है। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ कमजोर वर्गों को मिले, इसके लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। जनता इन योजनाओं का लाभ उठाएं और सरकार की सोच को साकार करने में सहयोग दें। राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को गति देने में शिथिलता और अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों को निष्ठा के साथ काम करने का निर्देश दिया।
डीपीआरओ वीरेंद्र कुमार, जिला नीलाम पदाधिकारी शशांक बरनवाल, वरीय उप समाहर्ता नागमणि कुमार वर्मा, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी भानू प्रकाश समेत कई विभागीय पदाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।
नारगंजो के जंगलों में आग का तांडव
वन विभाग की लापरवाही से पर्यावरण को खतरा
झाझा। संवाददाता। प्रखंड अंतर्गत उत्तरी नारगंजो के जंगलों में बार-बार लग रही आग ने पर्यावरण, वनस्पतियों और जंगली जीवों को गंभीर संकट में डाल दिया है। इस क्षेत्र में आग की घटनाएं इतनी बढ़ गई है कि अब यह जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों तक पहुंच रही है। तो कही खेतों में तैयार खड़ी फसल को भी अपने आगोश में ले रही है। जंगलों की भीषण आग की घटना ने बाराकोला पंचायत के गुटिगजार के रिहायशी इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थानीय लोगों ने नल जल योजना के पानी का इस्तेमाल कर किसी तरह आग पर काबू पाया, वरना पूरा इलाका जलकर राख हो सकता था। लेकिन सवाल यह उठता है कि वन विभाग और केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग इस संकट की रोकथाम के लिए गंभीर क्यों नहीं है। जानकारी के मुताबिक, जंगलों में आग लगने की मुख्य वजह ग्रामीणों द्वारा महुआ चुनने के लिए जानबूझकर आग लगाते हैं। लोग जानकारी के अभाव में ऐसा करते हैं, जिससे छोटी सी चिंगारी पूरे जंगल को अपनी चपेट में ले लेती है। इस बार की आग इतनी भयावह थी कि जंगल की वनस्पतियां और जीव-जंतु तो प्रभावित हुए ही, मृदा की उर्वरता भी खतरे में पड़ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार आग लगने से मिट्टी सख्त हो जाती है और उसकी मृदा शक्ति क्षीण हो जाती है। जंगल में प्राकृतिक पुनर्चक्रण की प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। बड़े पेड़ों के बीज, जो बारिश के मौसम में अंकुरित होकर नए पेड़ बनते हैं, आग की भेंट चढ़ रहे हैं। इससे जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र संकट में है। केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जंगलों की आग पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है लेकिन तकनीक कितनी भी उन्नत हो, जमीनी स्तर पर कार्रवाई के अभाव में यह नाकाफी साबित हो रही है। वन विभाग के अधिकारियों और फॉरेस्टरों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर वन विभाग स्थानीय लोगों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाए और जंगल की निगरानी बढ़ाए, तो इन घटनाओं पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। स्थानीय निवासी ने बताया कि हमारे पास आग बुझाने के लिए संसाधन नहीं है। अगर समय पर वन विभाग मदद करता, तो शायद इतना जंगल का नुकसान न होता। वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार, अगर जंगलों को आग से बचाने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर न सिर्फ जैव विविधता पर पड़ेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन की समस्या भी गंभीर हो सकती है।
गौर ए गणगौर माता खोल किंवाड़ी बाहर ऊबी थारी पूजन हाली
श्री श्याम मंदिर में एक अप्रैल को मनाया जाएगा पर्व
झाझा। संवाददाता। गणगौर के आते ही मारवाड़ी समाज के घरों में गणगौर के गीत गुंजायमान होने लगते हैं। उक्त पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, इसलिए इसे गणगौर तीज भी कहते हैं। राजस्थान के लोकपर्व में गणगौर भी एक प्रमुख पर्व है। गण अर्थात शिव, गौर यानी माता पार्वती। लोकमान्यतानुसार, शिव पार्वती का स्वरूप है गणगौर। मुख्यत: गणगौर सुहागन महिला अपने पति के दीर्घायु एवं युवतियां अपने लिए सुंदर वर के लिए करती है। सर्वप्रथम मिट्टी से ईशर, गणगौर की प्रतिमा बनाई जाती है, जिसे सोलह कुओं का पानी पिलाया जाता है। काजल व रोली की टिक्की से गणगौर का तिलक किया जाता है। चना एवं गेहूं से एक विशेष प्रकार का प्रसाद जिसे घुघरी कहा जाता है, गणगौर को अर्पित करने की सनातन प्रथा है। समाज की सभी महिला एवं युवतियां अपने प्रारम्पिक राजस्थानी परिधान में सज धज कर गणगौर की पूजा अर्चना करती है। उक्त गणगौर तीज महोत्सव आगामी 1 अप्रैल को स्थानीय श्री श्याम मंदिर, झाझा में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। प्रात: गणगौर की पूजा अर्चना एवं संध्या वेला में गणगौर की प्रतिमा का विसर्जन स्थानीय रेल तालाब में किया जाएगा। उक्त जानकारी अग्रवाल पंचायत समिति के मीडिया प्रभारी संजय बंका, नवनिर्वाचित मंडलीय उपाध्यक्ष अमन शर्मा ने देते हुए बताया कि गणगौर को लेकर समाज की महिलाओं एवं युवतियां में काफी उत्साह देखा जा रहा है। श्री बंका ने समाज के सभी सदस्य विशेषकर महिलाओं से अनुरोध किया है कि उक्त महोत्सव में सम्मिलित होकर अपने सामाजिक एकता व भव्यता का परिचय दें।
एक नाबालिग लड़की सहित कुल 4 महिलाओं के साथ नशे में धुत तीन लोगों ने की मारपीट
झाझा। संवाददाता। थाना क्षेत्र के डोमयमधु गांव में एक घर में घुसकर घर की तीन महिला और एक नाबालिग लड़की के साथ नशे की हालत में तीन लोगों ने मारपीट कर घायल कर दिया। घायल की पहचान 45 वर्षीय चंपा देवी, 31 वर्षीय संजू देवी, 30 वर्षीय अनरवा देवी और 15 वर्षीय चांदनी कुमारी के रूप में हुई है। सूचना मिलने पहुंची डायल 112 की पुलिस की मदद से सभी घायलों को इलाज के लिए रेफरल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर ने सभी घायलों का इलाज किया और स्थिति गम्भीर देखकर सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल जमुई रेफर कर दिया। घायल चंपा देवी ने बताई की हमसभी अपने घर पर थे कि तभी विनोद यादव एवं अन्य दो लोग नशे में धुत होकर मेरे घर में घुस गया। उस वक्त घर पर कोई पुरुष नही था, उसके बाद वे तीनों हमलोगों के साथ वाद विवाद करने लगा, जब हमलोगों ने विरोध किया तो उक्त तीनों ने हम सभी घर की महिला और नाबालिग लड़की के साथ मारपीट करते हुए घायल कर दिया। हल्ला मचाने पर जब गांव के लोग एकजुट होने लगा तो उक्त तीनों लोग मौके स्थल से फरार हो गया।
पीपीवाई कॉलेज में सेमेस्टर-3 की परीक्षा शांतिपूर्ण आयोजित
चकाई। संवाददाता। फाल्गुनी प्रसाद यादव महाविद्यालय चकाई में स्नातक सेमेस्टर थ्री की परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त आयोजित हुईं। जानकारी देते हुए प्रभारी प्राचार्य सह केंद्राधीक्षक डॉ. रविशंकर यादव ने बताया कि शुक्रवार को भी सेमेस्टर थ्री की परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त आयोजित हुई, जिसमें प्रथम पाली में 440 में से 435 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया जबकि 5 परीक्षार्थी परीक्षा से अनुपस्थित रहे। वहीं दूसरी पाली में 528 परीक्षार्थियों में से 520 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया, जबकि 8 परीक्षार्थी परीक्षा से अनुपस्थित पाए गए। वहीं परीक्षा के सफल संचालन में परीक्षा नियंत्रक पर प्रो. चंद्रशेखर पंडित, रामनारायण यादव, शरदेंदु शेखर, प्रमोद कुमार बाजपेई, विजय कुमार, करमचंद किस्कू, रोहित यादव, राजीव कुमार, राधिका कुमारी, पिंकी कुमारी, संगीता कुमारी सहित अन्य कॉलेज कर्मी मौजूद थे।
अवध किशोर सिंह के निधन से शोक की लहर
जमुई। संवाददाता। शहर के बाबू टोला, महिसौड़ी मोहल्ला निवासी एवं जाने-माने समाजसेवी अवध किशोर सिंह का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे करीब 86 वर्ष के थे। उन्होंने अंतिम सांस अपने पैतृक आवास पर ली। श्री सिंह अपने पीछे अपनी धर्मपत्नी, एक पुत्र, एक पुत्री समेत भरा-पुरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक आवास पर रखा गया है, जहां इंसानों का हुजूम उन्हें नमन कर रहा है। श्री सिंह का अंतिम संस्कार शुक्रवार को जमुई शहर के समीप बहने वाली किऊल नदी के तट पर किया जाएगा। जमुई के दिग्गजों ने अपने-अपने ढंग से संवेदना प्रकट करते हुए उन्हें भावांजलि दी है।
जानी-मानी समाजसेविका एवं विदुषी महिला डॉ. स्मृति पासवान ने अवध किशोर सिंह के निधन को जमुई के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है। उन्होंने उन्हें मानवता का पर्याय बताते हुए कहा कि वे देव तुल्य थे।
जिला विधिज्ञ संघ के पूर्व अध्यक्ष अश्विनी कुमार यादव ने अवध किशोर सिंह के निधन पर गहरा शोक प्रकट कर कहा कि उनके निधन से समाज के एक युग का अंत हो गया है।
शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी चंद्रमौलेश्वर सिंह उर्फ दामोदर बाबू ने कहा कि अवध किशोर सिंह के निधन से पूरा समाज शोकाकुल है। उनके जैसे मानव को खोकर हर इंसान के आंखों में आंसू है। जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष ई. शंभू शरण ने कहा कि अवध बाबू के निधन से समाज का एक मजबूत स्तंभ ढह गया है। एक समर्पित, कर्मठ और निष्ठावान व्यक्तित्व हमारे बीच से चला गया।
राज्य उद्घोषक डॉ. निरंजन कुमार ने कहा कि पिता तुल्य अवध किशोर सिंह महान विभूति के साथ महामानव थे। वे अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन हर इंसान को हमेशा मिलता रहेगा।
प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विशाल आनंद सिंह, डॉ. नेहा सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष कन्हैया कुमार सिंह, बीजेपी नेता निर्मल कुमार सिंह उर्फ बबलू जी, कुशल इंसान झून्ना सिंह, निखिल कुमार सिंह, अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह, पत्रकार राजेश कुमार सिंह, अधिवक्ता बलवंत सिंह, मुखिया प्रतिनिधिन कुणाल सिंह, गंगा सिंह, बबन सिंह आदि ने भी अवध किशोर सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
अंकित करने वाली बात है स्मृतिशेष अवध किशोर सिंह बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत त्रिपुरारी प्रसाद सिंह के अनुज थे।
विभिन्न मुद्दों को लेकर रसोईया संघ की बैठक आयोजित
चकाई। संवाददाता। चकाई प्रखंड अंतर्गत प्रखंड कार्यालय के परिसर में अवस्थित अंबेडकर चबूतरा में शुक्रवार को बिहार राज्य मध्याह्न भोजन रसोईया संघ की एक बैठक जिला अध्यक्ष रूबी देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में रसोइया के विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर विस्तृत विमर्श किया गया। साथ ही, सम्मानजनक वेतन की घोषणा नहीं होने पर विरोध का निर्णय लिया गया। मौके पर रूबी देवी ने कहा कि वर्तमान समय में रसोईया को महज 1650 रूपये मानदेय मिलता है, जो काफी कम है। यह राशि इस भीषण महंगाई में ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। संघ ने रसोइयों की समस्याओं से केंद्र सरकार एवं बिहार सरकार के मंत्रियों को आगत करा दिया है। लेकिन अबतक उन समस्याओं को दूर करने करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया है। वहीं पटना से आए संघ के प्रधान सचिव ऋषि कुमार ने कहा कि सरकार लगातार रसोईया भाई बहनों का शोषण कर रही है। ऐसे में अगर अब सम्मानजनक वेतन रसोईया के खाते में नहीं आता है तो सभी रसोईया झाड़ू, छोलनी एवं छनौटा लेकर मुख्यमंत्री के दरवाजे पर जाकर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीते 8 मार्च को राजभवन घेराव के बाद समाचार पत्रों के माध्यम से सरकार ने मानदेय वृद्धि की घोषणा भी की है। इसके अतिरिक्त बैठक में मृतक रसोईया के आश्रित को अनुदान राशि उपलब्ध कराने सहित अन्य मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक में बड़ी संख्या में रसोईया उपस्थित थे।
गर्मी शुरू होते ही बढ़ने लगी प्यास, अलीगंज में 40 फीट तक पहंचा भूजल
अलीगंज। संवाददाता। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। इसके साथ ही हर तरफ पानी की मांग भी बढ़ी है। जैसे-जैसे गर्मी और बढ़ेगी लोगों के कंठ और सूखने लगेंगे। प्यास अधिक सतायेगी। बाजार से लेकर गांव-देहात में पानी का भूजल स्तर पाताल की ओर भागेगी। अभी ही अलीगंज इलाके में पानी का औसत भूजल स्तर 40 फीट को पार कर गया है। अलीगंज प्रखंड जिले का सर्वाधिक जल संकट वाला क्षेत्र है। पानी की बर्बादी नही हो, इसकी अहमियत समझते हुए लोग जागरूक रहें। प्रखंड में अनेकों जगहो पर अभी ही पानी की संकट की सूचनाऐं मिलने लगी है। अनेको जगहों पर खराब पड़े चापाकल की वजह से उन इलाकों में पानी की किल्लत है। पीएचडी जेई मुकेश कुमार से पूछा गया तो बताया कि गर्मी में जल संकट से निपटने के लिए विभाग अभी से ही पूरी तरह से चौकसी बरत रहा है। इलाके में खराब चापाकलों की मरम्मत के लिए हर दिन दल सक्रिय होकर काम कर रहा है। आमजनों से अपील है कि लोग पानी को बर्बाद नही करें, नल जल के पानी से खेंतो का पटवन नही करें, पेयजल के महत्व को समझें।
दो साल में ही जर्जर हो गया 5.87 लाख में बना नाला
गिद्धौर। संवाददाता। गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत रतनपुर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में 15वां वित्त आयोग के तहत मुख्य सड़क से ट्रॉसफार्मर तक कराया गया नाला निर्माण दो साल में ही जर्जर हो गया। जिसको लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। बताया गया कि 15वें वित्त आयोग के तहत रतनपुर पीडब्लूडी रोड से ट्रांसफार्मर तक नाला निर्माण कार्य योजना संख्या 03/21-22 की प्राक्कलित राशि 5,87,650 रुपए से अभिकर्ता श्रवण कुमार एवं रतनपुर पंचायत समिति सदस्य सुनील राम ने कराया था। इस नाला के निर्माण होने के दो साल में ही यह जर्जर हो गया है। नाला का प्लास्टर झड़ गया है। ईंटों की कई परतें हट गई हैं। प्रमुख स्थानों पर डाले गए ढक्कन के स्लैब से भी सीमेंट, बालू का मसाला झड़ गया है और छड़ बाहर आ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाला का निर्माण तो हुआ है लेकिन इसका सदुपयोग नहीं हो पाया। वहीं इस बारे में गिद्धौर प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी बिपिन कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग की यह योजना प्रखंड विकास पदाधिकारी के मद के अंतर्गत आती है।
दिल का दौरा पड़ने से मोहलिया के शिक्षक की मौत
चंद्रमंडी। संवाददाता। चकाई प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय मोहलिया में कार्यरत शिक्षक नरेश दास का दिल का दौरा पड़ने से शुक्रवार को निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही शिक्षकों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जाता है की अवकाश रहने के कारण शिक्षक नरेश दास अपने घर पर ही थे। इसी बीच दोपहर बाद उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई। घर वालों द्वारा उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए देवघर ले जाया जा रहा था, देवघर पहुंचने के पहले ही उनकी मौत हो गई। मृतक पेटरपहाड़ी पंचायत के जलखारिया गांव के निवासी थे। वह अपने पीछे दो बेटी एक बेटा पत्नी सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की सूचना मिलते ही पत्नी किरण देवी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की पहचान कुशल व्यवहार एवं जानकार शिक्षक के रूप में होती थी। घटना की सूचना मिलते ही प्रमुख उर्मिला देवी, प्रमुख प्रतिनिधि अमीर दास मृतक के घर पहुंचे और गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। इधर कई शिक्षकों ने भी नरेश दास के निधन पर गहरा दुख जताते हुए मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।