जसीडीह/संवाददाता। जसीडीह थानांतर्गत शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय ने सोमवार को नमाज अदा कर हर्षोल्लास से ईद मनाई। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जसीडीह के संथाली मुहल्ला, रामचन्द्रपुर, रोहिणी,गंगटी, दिलदार नगर गंगटी, घाघी, बंधा केंदुआ, टावाघाट, खोरीपानन आदि गांवों के जामा मस्जिद एवं ईदगाह में सोमवार को नमाज अदा किया और एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की बधाई दी। मौलाना मिताई, मो शमीम, मो मुबारक, मो मोफीज, मो मकबूल, मो मजहर, मो समीर आदि बताया कि एक माह तक रोजा रखने के बाद आज ईद की खुशी दोगुनी हो गयी है। वहीं इंस्पेक्टर सह जसीडीह थाना प्रभारी दीपक कुमार पुलिस पदाधिकारियों एवं बलों के साथ थाना क्षेत्र में ईद शांति पूर्वक संपन्न कराने में जुटे रहे।
मजार पर चादरपोशी कर मांगी सलामती की दुआ
सारठ/संवाददाता। सारठ स्थित मखदूम षाह जहांनिया जहांगस्त रहमतुल्लाह अलैह के मजार पर तीसरे दिन भी जायरिनों का आने-जाने का तांता लगा रहा। दूर-दराज से आये हुए जायरिनों ने बाबा मखदूम के दरबार में माथा टेका और हाजिरी भी लगायी। कईलोगों ने चादरपोशी कर सलामती की दुआ मांगी। काफी संख्या में लोगों ने मेले का लुत्फ भी उठाया।
मारपीट का अलग-अलग मामला दर्ज
मधुपुर/संवाददाता। मधुपुर अनुमंडल के पाथरोल थाना क्षेत्र के छोटा संघरा गांव निवासी बालेश्वर दास ने गांव के ही वासुदेव दास पर गाली-गलौज करते हुए मारपीट कर जख्मी करने और पांच भरी चांदी का चेन जबरन छीन लेने का आरोप लगाया है। इधर वासुदेव दास ने बालेश्वर दास पर गाली-गलौज कर मारपीट करने का आरोप लगाया। पुलिस दोनों पक्षों से अलग-अलग केस दर्ज कर मामले की छानबीन कर रही है।
इनरव्हील क्लब के सहयोग से महिला थाना में योग सत्र का आयोजन
देवघर/नगर संवाददाता। आज के परिवेश में बढ़ते हुए तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इनरव्हील क्लब की अध्यक्ष अर्चना भगत के नेतृत्व में सचिव कंचन मूर्ति के सहयोग से स्थानीय महिला थाना में एक विशेष योग सत्र का आयोजन सोमवार को किया गया। कार्यक्रम में योग प्रशिक्षक विजया सिंह ने मानसिक तनाव को कम करने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के उपाय बताए। उन्होंने प्राणायाम एवं सूक्ष्म योग क्रियाओं का अभ्यास करवाया और बताया कि नियमित योग से न केवल मानसिक तनाव कम होता है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य में भी सुधार आता है। कार्यक्रम का मूल मंत्र खुश रहना ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। इस अवसर पर सरिका साह एवं निशा सिंह सहित कई महिलाए उपस्थित थी। सभी ने इस पहल की सराहना की और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योग को अपने जीवन में शामिल करने का संकल्प लिया।
मीना कुमारी भारतीय सिनेमा की थी ट्रेजेडी क्वीन : डॉ. प्रदीप
देवघर/वरीय संवाददाता। मीना कुमारी भारत की एक मशहूर हिन्दी फिल्मों की अभिनेत्री थीं। इन्हें खासकर दुखांत फ़ल्मिों में इनकी यादगार भूमिकाओं के लिये याद किया जाता है। आज ही के दिन 31 मार्च, 1972 को उनकी मृत्यु हुई थी। मौके पर स्थानीय ओमसत्यम इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म, ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मीना कुमारी को भारतीय सिनेमा की ट्र्रेजेडी क्वीन भी कहा जाता है। अभिनेत्री होने के साथ-साथ मीना कुमारी एक उम्दा शायारा एवम् पार्श्वगायिका भी थीं। इन्होंने वर्ष 1939 से 1972 तक फ़ल्मिी पर्दे पर काम किया। वे पहली बार 1939 में फिल्म निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म “लैदरफेस” में बेबी महज़बीं के रूप में नजर आईं। 1940 की फिल्म “एक ही भूल” में विजय भट्ट ने इनका नाम बेबी महजबीं से बदल कर बेबी मीना कर दिया। 1946 में आई फिल्म बच्चों का खेल से बेबी मीना 13 वर्ष की आयु में मीना कुमारी बनीं। मार्च 1947 में लम्बे समय तक बीमार रहने के कारण उनकी मां की मृत्यु हो गई। मीना कुमारी की प्रारंभिक फिल्में ज्यादातर पौराणिक कथाओं पर आधारित थीं जिनमें हनुमान पाताल विजय, वीर घटोत्कच व श्री गणेश महिमा प्रमुख हैं। 1952 में आई फिल्म बैजू बावरा ने मीना कुमारी के फिल्मी सफ़र को नई उड़ान दी। मीना कुमारी द्वारा अभिनीत गौरी के किरदार ने उन्हें घर-घर में प्रसिद्धि दिलाई। फिल्म 100 हफ्तों तक परदे पर रही और 1954 में उन्हें इसके लिए पहले फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1953 तक मीना कुमारी की तीन फिल्में आ चुकी थीं जिनमें : दायरा, दो बीघा ज़मीन और परिणीता शामिल थीं। परिणीता में उनकी भूमिका ने भारतीय महिलाओं को खास प्रभावित किया था चूंकि इस फिल्म में भारतीय नारी की आम जिंदगी की कठिनाइयों का चित्रण करने की कोशिश की गयी थी। उनके अभिनय की खास शैली और मोहक आवाज़ का जादू छाया रहा और लगातार दूसरी बार उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। 1954 से 1956 के बीच मीना कुमारी ने विभिन्न प्रकार की फिल्मों में काम किया। जहां चांदनी चौक और एक ही रास्ता जैसी फिल्में समाज की कुरीतियों पर प्रहार करती थीं, वहीं अद्ल-ए-जहांगीर और हलाकू जैसी फिल्में तारीख़ी किरदारों पर आधारित थीं। 1955 की फ़ल्मि आजाद, दिलीप कुमार के साथ मीना कुमारी की दूसरी फिल्म थी। ट्रेजेडी किंग और ट्रेजेडी क्वीन के नाम से प्रसिद्ध दिलीप और मीना के इस हास्य प्रधान फ़ल्मि ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। मीना कुमारी के उम्दा अभिनय ने उन्हें फिल्मफेयर ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया। फिल्म आज़ाद के गाने “अपलम चपलम” और “ना बोले ना बोले” आज भी प्रचलित हैं। 31 मार्च 1972, गुड फ्राइडे वाले दिन दोपहर 3 बजकर 25 मिनट पर महज 38 वर्ष की आयु में मीना कुमारी ने अंतिम सांस ली। पति कमाल अमरोही की इच्छानुसार उन्हें बम्बई के मज़गांव स्थित रहमताबाद कब्रिस्तान में दफनाया गया।
नर्सरी से स्वरोजगार की राह दिखा रहे हैं देवाशीष
मधुपुर/संवाददाता। मधुपुर सेठ विल्ला रोड में रहने वाले देवाशीष घोष उर्फ देवी चाहते तो किसी कंपनी में अच्छी नौकरी पा सकते थे लेकिन वह अपने शहर में रहकर ही स्वरोजगार पर फोकस किया और आज कुछ हटकर कर रहे हैं। आजकल के युवाओं को नर्सरी खोलने की जरा सा भी दिलचस्पी नहीं होती है, वहीं देवाशीष ने मधुपुर में इम्पा नर्सरी प्रारंभ कर इसका वर्षों से सफल संचालन कर रहे हैं। वह अपने साथ कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। नर्सरी से औषधीय पौधे, फूल के पौधे उपलब्ध करा रहे हैं। कई तरह के गार्डन प्लांट, 30 प्रजाति के क्रोटन सहित 100 से अधिक प्रजातियों के पौधे यहां उपलब्ध हैं पौधे की कीमत 20 रुपए से शुरू होती है। देवाशीष कहते हैं नर्सरी में बड़ीग, ग्राफ्टिंग, लेयरिग, गुटी बांधना, खाद तैयार करना, गमलो को भरने के लिए मिश्रण तैयार करना, थैली भरना, प्लास्टिक ट्रे में पौध तैयार करना, सजावटी पौधे किराये पर देना, बागवानी ठेकेदार, बागवानी सलाहकार इत्यादि के रूप में आज के युवा रोजगार की तरफ अपने कदम बढ़ा सकते है और अन्य युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर सकते हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में शून्य दुर्घटना के साथ हुआ कोयला उत्पादन
- लक्ष्य से कम हुआ उत्पादन
चितरा/संवाददाता। एसपी चितरा कोलियरी में वित्तीय वर्ष 2024-25 में शून्य दुर्घटना के साथ व्यापक पैमाने पर कोयला हुआ है, लेकिन उत्पादन लक्ष्य में पिछड़ा साबित हुई है। जिसका मुख्य कारण जमीन अधिग्रहण समस्या रही है। उक्त बातें एस पी माइंस एरिया के क्षेत्रीय महाप्रबंधक ए के आनंद ने वित्तीय वर्ष 31 मार्च को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यालय से 25 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन हमलोगों ने कोलियरी की स्थिति को देखते हुए 15 लाख टन कोयला उत्पादन करने का कमिटमेंट किया था। कहा कि फरवरी 25 तक हमलोगों ने 15 लाख 25 हजार टन कोयला उत्पादन कर लिया है। कहा कि फरवरी तक हमलोग 10 करोड़ का नुकसान में थे। साथ ही कहा कि मार्च महीने का हिसाब निकालने पर हमलोग नो लॉस नो प्रॉफिट में रहेंगे। वहीं दूसरी ओर कोयला उत्पादन में पिछड़ने का कारण जमीन की समस्या बताया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आगामी 25-26 में सभी ट्रेड यूनियन, सभी कर्मचारियों, सभी अधिकारियों व जमीन मालिकों के सहयोग से चितरा कोलियरी फिर से वही लय में होगा, और उत्पादन लक्ष्य की हमेशा अग्रसर रहेगा।