शिक्षा विभाग ने जारी की शिकायतों की श्रेणीवार सूची
विभाग ने दो टोल-फ्री नंबर किए जारी-14417 और 18003454417
पटना। संवाददाता। शिक्षक, छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों की समस्याओं के शीघ्र समाधान को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ी पहल की है। शिक्षा विभाग ने शिकायतों का वर्गीकरण करते हुए एक विस्तृत सूची जारी की है। इस सूची के माध्यम से अब शिकायतकर्ता अपनी समस्या की श्रेणी निर्धारित कर उचित समाधान के लिए संपर्क कर सकेंगे। इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने दो टोल-फ्री नंबर भी जारी किए हैं, जो इस प्रकार है : 14417 और 18003454417, जिन पर कॉल कर शिकायतें दर्ज करायी जा सकती है। जारी की गई सूची को 6 श्रेणियों में बांटा गया है।
शिकायतों की श्रेणीवार सूची में आधारभूत संरचना (जैसे भवन की मरम्मत, शौचालय, फर्नीचर, पेयजल, विद्युत कनेक्शन, पंखा, ट्यूबलाइट आदि) से जुड़े मामलों की शिकायत की जाएगी। वहीं, विद्यालय संचालन से संबंधित शिकायतों में वर्ग कक्ष का संचालन, कम्प्यूटर लैब की उपलब्धता और उपयोगिता, अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी, खेल सामग्री की उपलब्धता से जुड़े मामलों की शिकायतें की जा सकेंगी। इसके साथ ही शिक्षकों का आचरण, एमडीएम (मिड-डे मील) से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है।
इसमें स्थानांतरण से संबंधित अनुरोध और शिकायतें, वेतन भुगतान, वेतन वृद्धि, बकाया राशि का भुगतान, वेतन निर्धारण, मातृत्व/चिकित्सा/सीएल/ईएल की स्वीकृति, सेवानिवृत्ति लाभ से संबंधित भुगतान, सेवा पुस्तिका अद्यतीकरण और शिक्षक संबंधी आकंड़ों में किसी प्रकार के सुधार को शामिल किया गया है।
इसमें योजना संबंधी शिकायतें और सामान्य उपश्रेणी को शामिल किया गया है। इसमें कन्या उत्थान योजना, साइकिल योजना, पोशाक, छात्रवृत्ति, पाठ्य पुस्तक, एफएलएन कीट, स्थानांतरण प्रमाण-पत्र, अंकपत्र, प्रमाण-पत्र और छात्रा के साथ अमर्यादित व्यवहार को शामिल किया गया है।
इसमें निविदा, भुगतान, ऑन बोर्डिंग की समस्या आदि विषय शामिल हैं।
इसमें नामांकन, विलंब-सत्र, परीक्षा, शुल्क, प्रवजन प्रमाण-पत्र निर्गत नहीं होना, महिला प्राध्यापिका-छात्राओं के साथ अमर्यादित व्यवहार से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है।
किसी भी स्तर पर शिक्षा विभाग से संबंधित भ्रष्टाचार, घूसखोरी या गैरकानूनी वसूली की शिकायतें इस श्रेणी में दर्ज की जा सकती है।
इस सूची के अंत में ये भी बताया गया है कि शिक्षकगण अपनी समस्याओं से संबंधित शिकायत को अपने लॉगिन आईडी से ई-शिक्षाकोष के ग्रीवांस मॉड्यूल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। इसके अलावा शिक्षा विभाग के किसी भी स्तर के पदाधिकारी के व्हाट्सएप या ई-मेल पर शिकायत न भेजें।
पिंक बस चलाने के लिए दो हजार महिला चालकों को प्रशिक्षित करेगा विभाग
पटना। संवाददाता। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम पिंक बस चलाने के लिए दो हजार महिला चालकों को प्रशिक्षित करेगा। इसके लिए सोमवार को बीएसआरटीसी प्रशासक अतुल कुमार वर्मा और परिवहन विभाग की विशेष कर्तव्य अधिकारी अरुणा कुमारी ने प्रदेश के मोटर वाहन चालक प्रशिक्षण केंद्र के संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में यह जानकारी दी गई कि जल्द ही लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारी महिला चालकों को पिंक बस चलाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन चरण में 500-500 महिला चालकों को 30 दिनों तक बस चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जल्द इससे संबंधित आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। सभी आवासीय ट्रेनिंग स्कूल में साफ शौचालय, पेयजल की सुविधा, ऊंचे बाउंड्री वॉल होना अनिवार्य किया गया है। महिलाओं के लिए सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से व्यवस्थाएं पुख्ता होनी चाहिए। बस चलाने में निपुण महिला चालकों को ही सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
बीएसआरटीसी प्रशासक अतुल कुमार वर्मा के अनुसार, 80 पिंक बसें अगस्त महीने के आखिरी तक बिहार पहुंच जाएंगी। इन बसों को चलाने के लिए महिला चालकों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे उन्हें रोजगार मिल सकेगा। महिला चालकों के आवासीय प्रशिक्षण पर संचालकों के साथ मिलकर विभाग रूपरेखा तैयार कर रहा है। इस बैठक में पूर्णिया, औरंगाबाद, लखीसराय, मुंगेर, बांका, गोपालगंज, दरभंगा, सीवान इत्यादि जिले से मोटर वाहन प्रशिक्षण संस्थान के संचालक मौजूद रहे।
ट्रैफिक पुलिस ने सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत स्कूली बच्चों को किया जागरूक
स्कूल के बच्चों को जागरूक करना ही लक्ष्य : वी जी सतीश
आसनसोल। संवाददाता। दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के नियामतपुर ट्रैफिक पुलिस की ओर से सोमवार को राधानगर स्थित क्रिस्टोफर मिशन स्कूल में सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों बच्चों को सड़क पार करना, सड़क पर चलने के ट्रैफिक नियमों के बारे में बताया गया। हेलमेट न पहनने, शराब पीकर गाड़ी ना चलाने, जेब्रा क्रॉसिंग का उल्लंघन न करें और रेड लाइट जम्प करने जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। सड़क पर एक लापरवाही, जीवनभर की तकलीफ बन सकती है। मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) वी जी सतीश पसुमार्थी, एसीपी सौरव चौधरी, आसनसोल कोर्ट के अधिवक्ता, नियामतपुर ट्रैफिक प्रभारी शिव नंदन दुबे, कुल्टी ट्रैफिक प्रभारी चिन्मय मंडल, बराकर ट्रैफिक प्रभारी, नियामतपुर फाड़ी प्रभारी अखिल मुखर्जी क्रिस्टोफर स्कूल के निर्देशक सी के गोम्स, प्रिंसिपल ए के राणा सहित काफी संख्या में पुलिस अधिकारी व सीपीवीएफ उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री की संभावित जनसभा की तैयारी को लेकर भाजपा की बैठक
आसनसोल। संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जुलाई को दुर्गापुर के नेहरू स्टेडियम में संभावित भव्य जनसभा के मद्देनजर आसनसोल जिला भाजपा कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक आसनसोल जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य के नेतृत्व में हुई, जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने आगामी कार्यक्रम की तैयारियों पर गहन चर्चा की। जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य ने सभी कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री के संभावित आगमन के लिए युद्ध स्तर पर तैयार रहने का निर्देश दिया। उन्होंने मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं से भी अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकें आयोजित करने को कहा। श्री भट्टाचार्य ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के आगमन से पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनावों के लिए भाजपा का डंका बज जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आज से ही 2026 के लिए कमर कसने का आह्वान किया। यह बताते हुए कि प्रधानमंत्री का आगमन ही चुनाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण तैयारी है। भाजपा प्रदेश सदस्य कृष्णेंदु मुखर्जी ने जोर दिया कि आसनसोल जिले को प्रधानमंत्री के आगमन के लिए विशेष रूप से तैयार रहना होगा। उन्होंने सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं से आम जनता को कार्यक्रम से जोड़ने का आग्रह किया, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रधानमंत्री के वक्तव्य और भाषण को सुन सकें। जिला कार्यालय में आयोजित इस अहम बैठक का संचालन काकोली घोष ने किया। इस अवसर पर अर्जित राय, प्रशांत चक्रवर्ती, कुल्टी के विधायक डॉ. अजय पोद्दार, संतोष सिंह तथा जिला एवं मंडल के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे। बैठक में आसनसोल भाजपा जिला को इंचार्ज मीडिया प्रभारी संतोष कुमार वर्मा भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री की संभावित जनसभा को सफल बनाने और 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह उमंग निखर कर आएगा।
अवैध उत्खनन व परिवहन के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई में एक अवैध बालू लदा ट्रैक्टर जब्त
जमुई। संवाददाता। जमुई जिले में अवैध खनन और परिवहन पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जमुई थाना पुलिस ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बालू लदे एक ट्रैक्टर को जब्त किया है। थाना से प्राप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। ट्रैक्टर चालक वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके पश्चात वाहन को जब्त कर खनन अधिनियम एवं संबंधित धाराओं के तहत अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जमुई पुलिस ने बताया कि अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जिले भर में सघन जांच अभियान जारी है और लगातार निगरानी की जा रही है।
जमुई पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अवैध खनन या बालू-गिट्टी के अवैध परिवहन की सूचना पुलिस को दें, ताकि जिले में प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोका जा सके।
बाढ़ के समय मुफ्त मिलेगा पशुओं का चारा
- आपदा प्रभावित इलाकों में पशुओं की जीवन-रक्षा के लिए होगा चारे का वितरण
पटना। संवाददाता। बाढ़ जैसी आपदा से प्रभावित इलाकों में पशुओं की जीवन की रक्षा एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार का पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग आगे आया है। विभाग ने बाढ़ या किसी अन्य आपदा के समय नि:शुल्क पशुओं के लिए चारा मुहैया कराने की घोषणा की है।
विभाग द्वारा की गई घोषणा में कहा गया है कि आपदा प्रभावित पशुओं के जीवन की रक्षा के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से चारा वितरण के अस्थाई शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में पशुओं के आकार और संख्या के आधार पर चारा वितरण किया जाएगा।
आपदा से प्रभावित पशुओं के जीवन रक्षण के लिये सामान्यत बड़े जानवरों के लिये 6 किलोग्राम और छोटे जानवरों के लिए 3 किलोग्राम तथा भेड़-बकरियों के लिये 1 किलोग्राम प्रतिदिन के हिसाब चारा की आवश्यकता होती है। जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए शिविरों में एक बार में तीन दिन से लेकर एक सप्ताह के लिए चारा वितरण कराया जाता है। साथ ही, बाढ़ की स्थिति के अनुसार शिविर संचालन और वितरण कराया जाता है।
चारा वितरण सुचारु रुप से हो सके इसके लिए पहले ही सभी प्रभावित पशुओं के प्रकार और संख्या के आधार पर गणना कर पशुपालकवार टोकन वितरण किया जाता है। उस टोकन के आधार पर क्रमानुसार चारा का प्रबंध कर वितरित किया जाता है। इस संबंध में अधिक जानकारी पशुपालन निदेशालय, बिहार, पटना स्थित आपदा कोषांग (टेलीफोन नंबर 0612-2230942) या पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, बिहार, पटना (टेलीफोन नंबर 0612-2226049) से प्राप्त की जा सकती है।
10 से 15 जुलाई तक पटना में होगा मेगा जॉब फेयर 2025
मेले में 70 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां भाग लेगी
इसमें भाग लेने के लिए क्यूआर स्कैन करके कराएं निबंधन
पटना। संवाददाता। श्रम संसाधन विभाग के अंतर्गत बिहार कौशल विकास मिशन की तरफ से 10 से 15 जुलाई तक मेगा जॉब फेयर 2025 का आयोजन होने जा रहा है। इसका आयोजन पटना के दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान (वेटनरी कॉलेज ग्राउंड के नजदीक) में किया जाएगा। यह जानकारी सोमवार को श्रम संसाधन विभाग के मंत्री संतोष कुमार सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि यह रोजगार मेला बिहार के युवा प्रतिभाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। उन्हें देश की 70 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी पाने का अवसर मिलेगा। यह सरकार की प्रतिबद्धता है कि राज्य के योग्य युवाओं को उनके कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान किए जाएं।
विभागीय सचिव दीपक आनन्द ने बताया कि इस मेगा जॉब मेला में राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतिष्ठित कंपनियां भाग ले रही है, जिसमें एमआरएफ टायर, सबरोड लि, एलएंडटी, सुधीर पॉवर लिमिटेड, बारवेक्यू नेशन, केपीआर मिल्स, जुमाटो, मुथूट फाइनेंस समेत अन्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसमें 10वीं, 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा/पॉलीटेक्निक, बीटेक, एमबीए और अन्य डिग्रीधारकों के लिए रोजगार के विविध अवसर उपलब्ध होंगे।
विद्यालय में तालाबंदी कर ग्रामीणों ने जताया रोष, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
विद्यालय में 700 छात्रों पर मात्र 4 शिक्षक, ग्रामीणों ने की प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
जमुई। संवाददाता। जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय मगही में सोमवार को शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से क्षुब्ध स्थानीय ग्रामीणों और छात्रों ने विद्यालय के सभी कक्षाओं में ताला जड़ कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
स्थानीय ग्रामीण सहदेव यादव ने बताया कि इस विद्यालय में कुल 700 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं लेकिन केवल 4 शिक्षकों के भरोसे यह विद्यालय संचालित हो रहा है। न तो टोला सेवक की नियुक्ति हुई है और न ही शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में बहाली की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती, बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। ग्रामीणों ने जानकारी दी कि शनिवार को भी इसी मुद्दे पर स्कूल में ताला जड़ा गया था, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई। इसी के विरोध में सोमवार को फिर से विद्यालय खुलते ही सभी कमरों में ताला लगाकर विरोध जताया गया।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक उत्तम कुमार ने बताया कि पूरे मामले से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने भी स्वीकारा कि शिक्षक संख्या अत्यंत कम है और इससे पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मांगों में विद्यालय में कम से कम 10 शिक्षकों की त्वरित नियुक्ति, टोला सेवक की बहाली, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने को लेकर अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था रही।
साथ ही, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे और प्रखंड कार्यालय का घेराव करेंगे।
बिहार के स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात हुआ राष्ट्रीय अनुपात से बेहतर
- पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों की बहाली के कारण बदली पूरी स्थिति
पटना। संवाददाता। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विशेष पहल से पिछले तीन-चार वर्षों में सूबे में करीब तीन लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली हुई है। बड़ी संख्या में गुरुजनों की बहाली से सूबे के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की सूरत तेजी से बदल रही है। सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक की अनुपात (पीटीआर) दर घटकर प्रति शिक्षक 28 छात्र हो गई है। यह औसत पहली कक्षा से लेकर प्लस-टू यानी 12वीं तक के छात्रों और शिक्षकों की संख्या का अनुपात है। अगर पीटीआर का राष्ट्रीय औसत देखें, तो नीचले क्लास में प्रति शिक्षक 40 छात्र और ऊपरी क्लासों में प्रति शिक्षक 30 छात्र है।
राष्ट्रीय शिक्षा प्रोजेक्ट (एनईपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सरकारी स्कूलों में 2023-24 में क्लास 1 से 5 तक का पीटीआर 32, क्लास 6 से 8 का पीटीआर 19, क्लास 9-10 का 30 और क्लास 11 से 12 का पीटीआर 31 है। समेकित रूप से अगर क्लास 1 से 12वीं तक के पीटीआर को देखेंगे, तो यह प्रति शिक्षक छात्र का अनुपात 28 है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सत्ता में 2005 में आने के बाद से निरंतर शिक्षकों की बहाली हो रही है। सिर्फ इस वर्ष बीपीएससी से बहाल हुए करीब 1 लाख 20 हजार से अधिक शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने नियुक्ति-पत्र वितरित किया था। इससे अभी शिक्षकों की संख्या बढ़कर राज्य में करीब 6 लाख 60 हजार हो गई है। इससे पीटीआर में सुधार की दर और बेहतर होने की संभावना है। वर्तमान में सरकारी स्कूलों में पहली से 12वीं क्लास में निबंधित छात्रों की संख्या 2 करोड़ 13 लाख 48 हजार है।
बिहार में वर्ष 2015-16 के दौरान प्रारंभिक स्कूलों में पीटीआर प्रति शिक्षक 89 छात्र का अनुपात हुआ करता था। 2020-21 में इसमें सुधार हुआ और क्लास 1 से 12वीं तक का पीटीआर 47 पर पहुंच गया। इस वर्ष प्राथमिक स्कूल का पीटीआर 57, उच्च प्राथमिक स्कूल में 21, माध्यमिक स्कूल का पीटीआर 52 और उच्च माध्यमिक स्कूलों का पीटीआर 60 हुआ करता था। अब इसमें काफी सुधार हुआ है और राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो गया है। आने वाले समय में इसमें और सुधार होने की संभावन है।
अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग डॉ. एस सिद्धार्थ ने कहा कि शिक्षकों की लगातार बहाली से छात्र-शिक्षक अनुपात में काफी सुधार हुआ है। यह राष्ट्रीय अनुपात से भी बेहतर हो गया है। आने वाले कुछ महीनों में और शिक्षकों की बहाली होने तथा हाल में जिन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया है, उन सभी को जोड़ने से इस अनुपात के और बेहतर होने की संभावना है।
अब एक नंबर-112 ही काफी है! बिहार में डायल-112 बना भरोसे का दूसरा नाम
3 साल में 40 लाख लोगों की जान बचाई! संकट मोचन बनी बिहार की डायल-112 सेवा
महिला सशक्तिकरण से लेकर हाईवे पेट्रोलिंग तक, अब बस एक कॉल पर मिल रही सुरक्षा
पटना। संवाददाता। बिहार में एकीकृत आपातकालीन सेवा डायल-112 ने अपनी सफल शुरुआत के 3 साल पूरे कर लिए हैं। इन तीन साल में इस सेवा ने राज्य भर में 40 लाख से अधिक लोगों को त्वरित मदद पहुंचाकर आपातकालीन सेवाओं का नया कीर्तिमान बनाया है। मौके डीजीपी विनय कुमार पुलिसकर्मियों को सम्म्मानित किया। विनय कुमार ने बताया कि पुलिस विभाग औसतन 15 मिनट में सहायता पहुंचाता है। वहीं, हर दिन 65 हजार कॉल रिसीव करता है।
कॉल रिस्पॉन्स मामले में दूसरे नंबर पर बिहार
बिहार में जब से डायल 112 की शुरुआत की गई है तब से अब तक बिहार ने एक और कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। संकट के दौरान मांगी की मदद के आधार पर रिस्पॉन्स का गई कॉल्स इन आंकड़ों के लिहाज से बिहार, देश में कॉल रिस्पॉन्स के मामले में दूसरे स्थान पर है। डायल-112 को एकल हेल्पलाइन के रूप में विकसित किया गया है, जो पुलिस, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, हाईवे पेट्रोलिंग और डिजास्टर सेवाओं को एकीकृत करता है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित सफर सुविधा
डीजीपी ने जानकारी दी कि सितंबर 2024 में सुरक्षित सफर सुविधा की शुरुआत की गई थी। यह योजना के तहत जोे महिलाएं अकेली यात्रा करती हैं, उनके लिए सुरक्षा दीवार साबित हुई है। महिलाएं अपनी यात्रा की जानकारी पुलिस से साझा कर तकनीकी निगरानी में सुरक्षित गंतव्य तक पहुंच रहीं है। जरूरत पड़ने पर तुरंत एसएमएस भेजी जाती है। बिहार महिलाओं को ऐसा सुरक्षा कवच देने वाला देश का तीसरा राज्य है।
महिला पुलिस की अगुवाई में ऑपरेशन
गौर करने वाली बात ये कि पटना के कॉल टेकर सेंटर का संचालन भी महिला पुलिसकर्मियों की ओर से ही किया जा रहा है। जो महिलाओं के लिए सेवा को संवेदनशील और प्रभावी बना रहीं है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी प्रभावशाली पहल साबित हो रहा है, जिसका लाभ पूरे बिहार की महिलाओं को मिल रहा है।
संकट मोचन बना डायल 112
बिहार पुलिस की डायल-112 सेवा अब हर संकट का समाधान बन गया है। इस सेवा ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक, त्वरित रिस्पॉन्स और मानवीय संवेदनाओं के मेल से सुरक्षा का सशक्त आपातकालीन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकता है। यानी अब बिहार के नागरिकों को संकट के समय अलग-अलग नंबर नहीं, सिर्फ एक नंबर-112 की जरूरत है।