चलली गंगोत्री से गंगा मईया जग के करे उद्धार
पटना/संवाददाता । सामयिक परिवेश द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 10वां आदि शक्ति प्रेमनाथ खन्ना स्मृति समारोह में बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका और गंगा स्वच्छता मिशन की बुडको ब्रांड एंबेसडर डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने बिहार के अनेक पारंपरिक लोकगीतों को माता गंगा को समर्पित करते हुए वरदान मांगा कि देश की सुख और समृद्धि तथा सदैव बढ़ोतरी के लिए अपना आशीर्वाद बनाए रखें। कार्यक्रम में गंगा अवतरण के प्रसंग पर विस्तार से चर्चा करते हुए लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने चलली गंगोत्री से गंगा मईया जग के करे उद्धार गीत गाया। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मां गंगा के पावन तट पर रहने वाले हम बिहारियों के दिल में मां गंगा ही रहती हैं। जन्म से मृत्यु तक के हर संस्कार में और विश्व के सबसे बड़े लोक त्यौहार में मां गंगा आशीर्वाद देने के लिए साक्षात हमारे साथ बनी रहती हैं। मां गंगा के पावन तटों की साफ-सफाई हम सब की जिम्मेदारी है। सांस्कृतिक संध्या में नीतू नवगीत ने मांगी ला हम वरदान हे गंगा मैया गीत गाकर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर किया।
गायिका नीतू नवगीत ने वरिष्ठ गजलकार ममता मेहरोत्रा की कई गजलों की भी प्रस्तुति दी जिसे सब ने सराहा। इन गजलों में आज भी खुश हूं बीते कल की तरह
फ़क्रि मेरी है गंगा जल की तरह,
खुशियां ढूंढते रहते हैं,जीवन में दुख को पाले हम
रंगमंच है यह दुनिया,किरदार निभाने वाले हम
बाहर की दुनिया का कोई दर्पण साफ़ नही होता
दिल के आईने में देखें,गोरे हैं या काले हम
मानवता के लायक़ पहले मन को कर लें,उसके बाद
चाहे जितने भी बनवा लें, मस्जिद और शिवाले हम जैसे गजल गाए। कार्यक्रम में धीरज पांडेय ढोलक पर, आशीष पंडित जी पैड पर और सुरेश कुमार जी कैसियो पर लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत के साथ संगत किया।
वज्रपात से मृत युवक के परिजन से मिले चंदन सिंह
चकाई /संवाददाता । माधोपुर पंचायत के चोरकट्टा गांव में मंगलवार को वज्रपात से एक युवक की मौत पर घटना के दूसरे दिन बुधवार को भी गांव में मातमी माहौल रहा।घटना की सुचना मिलने के बाद चंदन सिंह फाउंडेशन के प्रमुख चंदन सिंह ने मृत युवक के परिजनों से मिलकर घटना पर दुख जताया और परिजनों को इस दुख की घड़ी में धैर्य और हिम्मत की सांत्वना दिया। उन्होंने आर्थिक मदद करते हुए हर संभव सहायता का आश्वासन परिजनों को दिया है। वही अन्य घायल युवक के परिजनों से भी मिले।बताते चले कि मंगलवार को
वज्रपात की चपेट मे आने से चोरकट्टा निवासी पिंटू रजक के 14 वर्षीय पुत्र अजय कुमार की मौत हो गई थी। जबकि मोहन रजक, विपुल रजक, शिवम रजक एवं विकास रजक घायल हो गए थे। जानकारी के अनुसार सभी युवक अपनी मवेशियों को चराने के लिए गांव से कुछ दूरी पर स्थित ललुआ मारन बहियार गए थे।तभी बारिश होने लगी। तभी बारिश से बचने के लिए एक ही छाता के निचे बचने के पांचो बैठ गए। इसी दौरान वज्रपात हो गई। इस घटना मे एक युवक की मौत मौत हो गई और चार घायल हो गए थे।
आजादी के बाद आज तक नहीं बन पाया पुल, जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं लोग
पुल के अभाव में नर्क बना जिंदगी, लोगों ने गर्भवती महिला को पकड़ कर पार कराया नदी
चकाई /संवाददाता । चकाई प्रखंड अंतर्गत गजही पंचायत के पतरो नदी पर बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सरकार के विकास के सभी दावों की पोल खोलकर रख दी। प्रखंड के गजही पंचायत के सुंदरी, बरदघटी सोने, कर्माटांड, दिघरिया, कौशमाहा, घुठिया एवं कोरैया गांव के लोगों को पतरो नदी से होकर ही गुजरना पड़ता है। ऐसे में इस नदी पर पुल नहीं होने से खासा परेशानी होती है। खासकर के बरसात में गर्भवती महिलाओं एवं मरीजों को बड़ी मुश्किल से नदी होकर बाहर निकाला जाता है। ऐसे में कई बार तो मरीजों की स्थिति दयनीय बन जाती है। सुंदरी गांव के ही संतोष दास की पत्नी काजल कुमारी को मंगलवार की रात्रि में प्रसव पीड़ा हुआ। लेकिन नदी के तेज बहाव के देखकर परिजन रात में नदी पार करने का हिम्मत नहीं कर पाए। ऐसे में घर वालों ने रात भर किसी तरह उसे घर पर ही रखा। लेकिन बुधवार की सुबह जब प्रसव पीड़ा बढ़ गई तो घर वाले और कुछ ग्रामीणों ने उसे मुश्किल से नदी पार कराया। तीन से चार की संख्या में महिला एवं पुरुष सदस्यों ने उसका हाथ पकड़ कर तेज धार से होकर उसे नदी पार कराया। इस क्रम में नदी पार करने के दौरान कई दफा ऐसा लगा कि तेज बहाव में सभी का पैर जमीन से उखड़ सकता है। लेकिन लड़खड़ाते कदमों से किसी तरह सभी ने गर्भवती महिला को नदी पार कराया।
स्थानीय बीरेंद्र कुमार वर्मा, विजय कुमार वर्मा, नन्दलाल वर्मा, विकास दास, राहुल दास, भोलिया देवी, मीणा देवी आदि का कहना है कि गांव से बाहर निकलने का दूसरा कोई विकल्प नहीं है। नदी होकर ही गांव से बाहर निकलना पड़ता है। ग्रामीणों ने यह भी बताया की कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सरकारी बाबुओं से पुल निर्माण की मांग की गई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हर बार आश्वासन के सिवाय कुछ भी नहीं मिला। ऐसे में आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद भी यहां के लोगों की जिंदगी एक अदना सा पुल के अभाव में नर्क सा बनकर रह गया है। साथ ही सरकार के विकास के दावे की पोल खोल रहा है।